ज़माने के दर्द सारे पराये हो गए
बहारों में चले थे संग बिरहा में साये हो गए
तेरी मीठी यादें सहलाती थी साँसों को
मुलाकातें नम कर देती थी आंखों को
यादों के वो फूल सारे मुरझाये हो गए
बहारों में थे संग बिरहा में साये हो गए
ज़माने के दर्द सारे पराये हो गए
बहारों में थे संग बिरहा में साये हो गए
वो मद भरी आँखें मदहोश करती थी आहों को
आहों पे उठता गिरता सीना बेचैन करता निगाहों को
अब मदिरा के सारे जम शरमाये हो गए
बहारों में थे संग बिरहा में साये हो गए
ज़माने के दर्द सारे पराये हो गए
बहारों में चले थे संग बिरहा में साए हो गए
आज भी सजदा अधरों पे ठहरी तेरी मुस्कान को
दिल में संभाले रखा शोला -तेरी पहचान को
क्या वो मेरी वफ़ा के दीप सारे फद्फदाये हो गए
बहारों में थे संग बिरहा में साये हो गए
ज़माने के दर्द सारे पराये हो गए
बहारों में चले थे संग बिरहा में साये हो गए
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